गरीबो को उच्च शिक्षा प्रणाली से बहार धकेला, फीस दस गुना से बढ़ाई

बिक गया है देश अमीरो को!!

https://www.livemint.com/education/news/iits-increase-m-tech-fees-by-up-to-10-times-to-2-lakh-per-year-1569609681727.html

भारत सरकार ने सभी IITs की M.tech की फीस २०००० से २००००० कर दी, यानि दस गुना से बढ़ा दी। साथ ही साथ गेट से पास हुए बच्चो को मिलने वाला १२५०० वेतन  भी बंद कर दिया। इस लेख में, मैं आपको सरकारके इस निति के परिणाम और मेरे विचारों में उसके पीछे का उद्देश्य बताऊँगा।
इस दस गुना फीस बढ़ने से सबसे पहले नीचले तबके से आने वाले बच्चे अब भारत के सबसे बेहतरीन विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ पाएंगे। भारत में करीबन ८० करोड़ जनसँख्या की प्रतिदिन औसत खर्च क्षमता ५० रुपये से कम है। चाहे सरकार कुछ भी बोले भारत में आज भी बहुत बड़ी संख्या गरीबी में है। यह गरीबी हमारी जाती संस्था के बिलकुल साथ चलती है, मतलब पिछड़ी जाती के लोग आर्थिक रूप से भी सबसे नीचे तबके के है। यह फीस बढ़ने से और गेट में मेरिट से आये हुए बच्चो के स्टिपेन्ड के बंद करने से अब गरीब और पिछड़ी जाती के लोग इंजीनियरिंग की शिक्षा से बहार हो जाएंगे। अभी भी देश में सिर्फ ३० प्रतिशत बच्चे बारवी कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए जाते है। अगर शिक्षा को और मेहेंगा किया तो और कम बच्चे शिक्षित हो पाएंगे। वैसे ही देश में बारवी तक पढ़ के किसी प्रकार का सार्थक रोज़गार नहीं मिलता, अबगरीब लोग उच्च शिक्षा से मिलने वाले उस सार्थक रोज़गार को पाने की कोशिश भी नहीं कर पाएंगे।

भारत की बढ़ती गरीबी को ध्यान में रखते हुए इसी सरकार ने कुछ समय पहले १० प्रतिशत रिजर्वेशन गरीब तबके के लोगो को दिया था। अब उसी रिजर्वेशन का वास्तविकता में अर्थ मिटाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। 2014 में इस सरकार ने आते ही सबसे पहले भारत सरकार के द्वारा दी जाने वाली पोस्ट मीट्रिक स्कालरशिप को बंद करने की कोशिश की और अब वह स्कालरशिप बहुत कम रह गयी है। गरीब परिवार उच्च शिक्षा में अपने बच्चो को भेजने के लिए इतना संगर्ष और मेहनत करते है जिसका अंदाज़ सिर्फ वो परिवार ही लगा सकते है। रिजर्वेशन से आये हुए ज़्यादातर बच्चे आर्थिक रूप से निचले तबके के होते है। एक तरफ सरकार रिजर्वेशन देके बच्चो को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है और दूसरी तरफ उच्च शिक्षा को इतना मेहेंगा बना रही है की कोई निचले तबके और पिछड़ी जाती का बचा रिजर्वेशन से आने के बावजूद उसमे पढ़ न पाए।

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किसी भी देश में सरकार का काम होता है अपने बच्चो को शिक्षा देना, खासकर के निचले तबके के बच्चो को जो उस शिक्षा की बड़ी आवश्यकता में है। शिक्षा की वैसे तो सबको आवश्यकता होती है लेकिन निचले तबके को ज़्यादा इसलिए है क्योंकि हमारी शिक्षा प्रणाली देश में सार्थक नौकरी पाने का एक मात जरिया है। निचले तबके के लोगो के पास न अपने धंधे है, न ही जमा पूँजी या पुश्तैनी ज़मीन या कारोबार है जिससे वो अपनी रोज़ी रोटी खुद कमा सके। नौकरिया उनके इस गरीब अवस्था से बहार आने का सबसे महत्त्वपूर्ण जरिया है। यह सिर्फ गरीब अवस्था से बहार आने का ही नहीं बल्कि समाज में एक इज़्ज़त बनाने का उसमे में बदलाव लाने का उससे आगे बढ़ने का भी एक जरिया है। बाबासाहेब आंबेडकर ने जब ‘शिक्षित हो, संगर्ष करो, संगठित हो’ का नारा दिया था तो उन्हें मालूम था की शिक्षा उन्हें और पिछड़े जाती के लोगो को जाती प्रथा के क्रूर अन्याय से आज़ाद करेगी। यह उच्च शिक्षा को बार बार मेहेंगा करके और सभी पिछड़ी जातियों को मिलने वाली स्कालरशिप को बंद करके यह सरकार जाती प्रथा को एक आर्थिक प्रथा के ज़रिये बनाये रखना चाहती है। सिर्फ जाती प्रथा ही नहीं जिस देश में आज भी भूखमरी हो, किसान गरीबी से आत्महत्या कर रहा हो, पांच साल से कम उम्र के बच्चो का स्वास्थ्य दुनिया के सबसे पिछड़े देशों के जैसा हो, मज़दूर के पास शहरों में रहने को घर और खाने को अन्न न हो, छोटा कारोबार दिन पर दिन बंद हो रहा हो, बेरोज़गारी अपनी चरम पर हो और इन सब सच्चाइयों के होने के बावजूद सरकार को यह लगता है की उच्च शिक्षा को और मेहेंगा होना चाहिए तो मैं इसे एक देश के हित के खिलाफ एक कानून मानूंगा। में तो इसे एक तरीका मानूंगा जिस से शिक्षा पे सिर्फ उच्चे तबके और जातियों का कब्ज़ा रहे और उसके ज़रिये उनकी समाज में जो शक्ति है वो बनी रहे। यहाँ तक की में आपको आज ही मेरा अनुमान बता देता हूँ की कुछ सालो बाद IIT में रिजर्वेशन में सीटों का न भरना एक कारण दिया जाएगा रिजर्वेशन को हटाने के लिए, लेकिन उस समय सच यह होगा की आपने उच्च शिक्षा को इतना मेहेंगा कर दिया था की पिछड़ी जाती और गरीब बच्चा उसका फॉर्म भी नहीं भर पाया।
यह फीस बढ़ाते वक़्त एक तर्क दिया जाता है की अब यह विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जायेंगे और बेहतर शिक्षा दे पाएंगे, यह तर्क अपने आप में गलत है। सरकारी उच्च विश्वविद्यालय शिक्षासर्कार द्वारा दी गयी एक सेवा है जो सभी देशवासियो के लिए उपलब्ध होनी चाहिए बिना भेदभाव के, यह कोई धंधा नहीं है जिसमे आप फीस बढ़ा के मुनाफा कामना चाहते हो। सरकार के प्रत्येक निवासी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स भरता है और ऐसे सेवाओं को पाने के लिए भरता है। इन सरकारी सेवाओं को मेहेंगा करके भारत की अधिकतर जनसँख्या से दूर ले जाना का तरीका है। देश को अशिक्षित और बेवकूफ बनाये रखने का एक तरीका है। अगर ऐसा नहीं है तो यह सरकार क्यों M.Tech में आये बच्चे जिनकी आयु २२ साल से ज़्यादा है स्टिपेन्ड देने से इंकार कर रही जबकि उससे उसकी सख्त ज़रुरत है ताकि वो अपनी और आपने परिवार की ज़रूरते पूरी कर सके। में जानता हूँ की आज के समय में सरकार के खिलाफ कुछ भी बोलना या लिखना देश द्रोह के बराबर होता है और अगर मेरे इस बात को लिखने को देशद्रोह माना जाएगा और अगर यह देश द्रोह है तो इसकी सजा में ख़ुशी ख़ुशी स्वीकारने को तैयार हूँ।

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